
आगरा: डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के परिसर में शनिवार को गुरु पूर्णिमा और राष्ट्र रक्षा सूत्र के संयुक्त समारोह ने सामाजिक सद्भाव की एक नई मिसाल पेश की। भारतीय सद्भावना मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आरएसएस के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सरपरस्त माननीय इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
अपने संबोधन में Indresh Kumar ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहजीब है। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई—ये सभी समुदाय भारतीय संस्कृति की उसी धारा के अटूट हिस्से हैं। धर्म परिवर्तन के बावजूद हमने अपने साझा बुजुर्गों और सांस्कृतिक विरासत को नहीं छोड़ा। उन्होंने भावुक उदाहरण देते हुए कहा कि हम सबके सपने भारतीय भाषाओं में ही आते हैं। कोई भी आम भारतवासी सपने में तुर्की, चीनी, रूसी, अफगानी या अरबी भाषा नहीं बोलता। यह इस बात का प्रमाण है कि हम सांस्कृतिक रूप से एक हैं। मालिक ने भी हमें एक रहने की सीख दी है, इसलिए हमें मोहब्बत के साथ रहने का संकल्प लेना चाहिए।
रक्षा सूत्र का भावुक क्षण

कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण पल तब आया जब सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय सह-संयोजिका अंजुम अंसारी ने इंद्रेश कुमार को रक्षा सूत्र बांधा और आशीर्वाद लिया। इस क्षण को उपस्थित लोगों ने भाईचारे और आपसी सम्मान का प्रतीक माना। अंजुम अंसारी ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कोषाध्यक्ष अनिल गर्ग को भी राखी बांधकर सम्मानित किया।
संगठन से जुड़ी चर्चा
इस अवसर पर सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक कल्लू अंसारी, अंजुम अंसारी, हन्नान अंसारी और जाहिद सैफी ने इंद्रेश कुमार से मुलाकात की। इंद्रेश कुमार ने कल्लू अंसारी के साथ संगठन की गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कल्लू अंसारी के पुत्र हन्नान अंसारी को विशेष आशीर्वाद दिया और युवाओं को सामाजिक समरसता के कार्यों में आगे आने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक इस्लाम अब्बास अपनी धर्मपत्नी के साथ उपस्थित रहे। क्षेत्रीय संयोजक इस्लाम खान भी मंच पर मौजूद थे। पूरा कार्यक्रम शांति, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहा।
सद्भावना का संदेश
उपस्थित लोगों का मानना था कि आज के समय में जब समाज में कई बार विभाजनकारी स्वर सुनाई देते हैं, तब ऐसे कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाते हैं। इंद्रेश कुमार के संबोधन ने एक बार फिर याद दिलाया कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में एकता है। गंगा-जमुनी तहजीब सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही जीवन शैली है।
कार्यक्रम के दौरान कई लोगों ने कहा कि जब समाज के अलग-अलग वर्ग एक मंच पर आकर एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तो राष्ट्र और मजबूत होता है। रक्षा सूत्र बांधने का यह प्रतीकात्मक कदम सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और भाईचारे का संदेश था।
निष्कर्ष

आगरा के भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित इस गुरु पूर्णिमा एवं राष्ट्र रक्षा सूत्र समारोह ने सामाजिक सद्भाव की एक यादगार तस्वीर पेश की। Indresh Kumar के विचार और अंजुम अंसारी द्वारा रक्षा सूत्र बांधने के क्षण ने पूरे कार्यक्रम को अर्थपूर्ण बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि मोहब्बत और सम्मान के रास्ते पर चलकर ही मजबूत और एकजुट भारत का निर्माण संभव है।
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