
बिहार में एक बार फिर शराब तस्करी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार तस्करी करने वाली कोई आम महिला नहीं, बल्कि पढ़ी-लिखी स्नातक युवती निकलीं। समस्तीपुर जिले की 25 वर्षीय Neha Jha को दिल्ली-जयनगर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में 1.5 लाख रुपये की विदेशी ब्रांडेड शराब के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया।
रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) की टीम ने जब कोच में चेकिंग शुरू की तो नेहा और उनके रिश्तेदार ईशान कुमार के बैग से शराब के कई कार्टन बरामद हुए। दोनों को हिरासत में लेकर स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में समस्तीपुर जिला जेल भेज दिया।
कौन हैं नेहा झा?
नेहा झा समस्तीपुर जिले के बारी गांव की रहने वाली हैं। वे एल.एन. मिथिला विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से स्नातक हैं और उच्च शिक्षा के लिए दरभंगा में रह रही थीं। पहली नजर में देखने पर कोई सोच भी नहीं सकता कि एक पढ़ी-लिखी युवती फर्स्ट एसी में बैठकर शराब की तस्करी कर रही होंगी।
लेकिन पुलिस का दावा है कि यह सिर्फ इत्तफाक नहीं था। जांचकर्ताओं के अनुसार नेहा लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं। वे जानबूझकर फर्स्ट एसी कोच चुनती थीं ताकि चेकिंग से बचा जा सके।
परिवार की पुरानी कहानी
पुलिस का कहना है कि नेहा की यह पहली गिरफ्तारी है, लेकिन उनके परिवार का शराब के अवैध कारोबार से पुराना नाता रहा है। उनके पिता और बहन पहले भी बिहार शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार हो चुके हैं।
नेहा के जीजा इस समय छपरा जिला जेल में शराब संबंधी मामले में बंद हैं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि उनके जेल जाने के बाद नेहा ने ईशान कुमार की मदद से सप्लाई का काम संभाल लिया था। ईशान खुद बी.टेक ग्रेजुएट हैं और नेहा की बड़ी बहन के पति के भाई हैं।
किसके लिए थी शराब?
पुलिस के अनुसार बरामद शराब दरभंगा के कुछ डॉक्टरों, व्यापारियों और संपन्न लोगों तक पहुंचाने के लिए ले जाई जा रही थी। जांच में यह भी पता चलने का दावा किया जा रहा है कि नेहा और उनके सहयोगी होम डिलीवरी नेटवर्क भी चलाते थे। यानी सिर्फ थोक सप्लाई नहीं, बल्कि सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का सिस्टम था।
जीआरपी इंस्पेक्टर बिरबल कुमार ने बताया कि नेहा कथित रूप से काफी सावधानी से काम करती थीं। फर्स्ट एसी कोच का चयन भी इसी रणनीति का हिस्सा था।
बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्करी
बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद पड़ोसी राज्यों से शराब लाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल आम बात हो गई है। पुलिस का कहना है कि तस्कर अक्सर एसी कोच का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि वहां चेकिंग अपेक्षाकृत कम होती है और यात्री प्रोफाइल भी अलग होती है।
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ अगस्त 2026 में ही बिहार पुलिस ने पूरे राज्य में 1.12 लाख छापेमारी की। इस दौरान 7.10 लाख लीटर शराब जब्त की गई और करीब 11,300 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि शराबबंदी के बावजूद नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा
Neha Jha के गिरफ्तार होने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। लोग हैरान हैं कि एक स्नातक युवती फर्स्ट एसी में बैठकर इतनी बड़ी खेप कैसे ले जा रही थीं। कुछ लोग परिवार की पुरानी पृष्ठभूमि पर सवाल उठा रहे हैं, तो कुछ लोग बिहार में शराबबंदी के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब आगे क्या?

पुलिस अब नेहा के कथित ग्राहक नेटवर्क की जांच कर रही है। दरभंगा के उन लोगों की शिनाख्त की जा रही है जिन्हें यह शराब पहुंचानी थी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या और लोग भी इस सप्लाई चेन से जुड़े हुए हैं।
फर्स्ट एसी कोच में पकड़ी गई यह युवती अब सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि बिहार में शराब तस्करी के बदलते स्वरूप का प्रतीक बन गई है। पढ़ाई का कवर, एसी कोच की सुविधा और परिवार की पुरानी पृष्ठभूमि… यह मामला कई सवाल छोड़ गया है।
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