Jashn-e-Peer Chiragi 2025: अलीगढ़ में सूफियाना अंदाज़ में सजी महफिल, छोटे शाह और बिलाली पीर की मौजूदगी में रूहानी जश्न

Written by: Asiya Shaheen

अलीगढ़ के चिरागी में जश्न-ए-पीर! धड़कते दिलों की दुआओं, सूफी रंग और रूहानी जज्बे से गूंजा शहर

Jashn-e-Peer Chiragi 2025 का आयोजन अलीगढ़ की चिरागी दरगाह पर सूफियाना अंदाज़ में हुआ। इस रूहानी महफिल में छोटे शाह (Irfani Peer), बिलाली पीर (Shabbir Shah) समेत कई प्रमुख सूफी संतों और हज़ारों मुरीदों ने शिरकत की। कव्वालियों की सजी महफिल, चादरपोशी, दुआओं और आस्था के इस आयोजन ने शहर की फिज़ा को रूहानी रंगों से भर दिया। यह कार्यक्रम सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि एकता, प्रेम और श्रद्धा की मिसाल बना। Jashn-e-Peer Chiragi 2025 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सूफी परंपरा आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।

अलीगढ़ की फिज़ा में उस शाम कुछ और ही था…
न हवा वही थी, न शाम वो आम थी।
चिरागी के मैदान में इबादत की खुशबू थी,
और हर सांस में बसी थी पीर बाबा की याद।

क्या था ये जश्न?

नाम था — ‘Jashn-e-Peer Chiragi’,
और मक़सद था — आस्ताने की रौशनी में मोहब्बत और अमन के चिराग जलाना।

किसने किया आयोजन?

इस सूफियाना शाम को शब्बीर शाह उर्फ़ बिलाली पीर ने अपने सरोकार से सजाया।
जिनके लिए मुरीद कहते हैं —

“बाबा की महफिल हो और बिलाली साहब न हों, तो बात अधूरी लगती है!”

गद्दीनशीन कौन रहे?

इर्फ़ानी पीर उर्फ़ छोटे शाह —
जिनकी दुआओं और मौजूदगी से महफिल में नूर और सुकून दोनों ही बरस रहा था।

महफिल में कौन-कौन रौशन सितारे थे?

  • जमाली पीर — जिनकी नज़रों में नर्मी और बातों में असर था
  • भोला पीर — जो हर साल इस महफिल का सुकून हैं
  • नूरी शाह पीर — जिनके आने से ही जैसे महफिल मुकम्मल हो जाती है
  • बरकाती पीर — जिनकी दुआओं में लोगों की राहत दिखती है

और भी कई दरगाही चेहरे जिनका नाम हो या न हो, उनकी मौजूदगी ही काफी थी

क्या हुआ महफिल में?

  • चादरपोशी हुई, नज़्रें चढ़ीं, दुआओं का दौर चला

  • कव्वालों ने ऐसी महफिल सजाई कि लोगों की आंखें भर आईं

  • “दमादम मस्त कलंदर” से लेकर “भर दो झोली मेरी” तक — हर अल्फ़ाज़ रूह में उतरता चला गया

  • लाइट्स, इत्र, गुलाब की पंखुड़ियाँ, और माहौल… एक तस्वीर बन गया जो दिल से मिटने वाला नहीं

 लोग क्या बोले?

एक बुज़ुर्ग हज़रत जो ज़मीन पर बैठकर तस्बीह घुमा रहे थे, बोले:

“हर साल आता हूं… जब पीरों की याद में दुआ होती है, तो ऊपर वाला भी नज़र करता है।”

एक लड़की जिसकी आंखों में आंसू थे, बोली:

“मैंने यहां मांगी मन्नतें पाई हैं… ये कोई आम जगह नहीं, ये रूहानी ठिकाना है।”

नतीजा क्या रहा?

एक लाइन में कहें तो —
“ये मज़हबी जलसा नहीं, दिलों का जश्न था।”

जहां दुआ थी, इबादत थी, पीर थे और ईमान था। और इस बार की महफिल ने एक बार फिर साबित कर दिया — चिरागी की ज़मीन पर जब सूफी जश्न होता है, तो सिर्फ लोग नहीं… दुआएं भी उमड़ती हैं।

Also Read

Delhi CM Oath Ceremony: 50 फिल्मी सितारे, बड़े उद्योगपति सहित ये मेहमान होंगे शामिल, देखें पूरी लिस्ट

Groom Found Dead Before Wedding: हाथों में मेहंदी, बदन पर कफन! बारात से पहले पेड़ पर लटका मिला दूल्हे का शव

सीएम योगी ने कथावाचक चोटी मामले में इटावा एसएसपी की जमकर लगाई फटकार

monsoon

Delhi Monsoon 2026 कब आएगा? क्या इस बार फिर होगा जलभराव? IMD का पूरा अपडेट

अरावली पर्वत श्रृंखला: प्राचीन योद्धा जो 2 अरब साल से भारत की रक्षा कर रही हैं

You Might Also Like

डॉ. एम. वसी बेग

Gen Z Behavior: डिजिटल युग में जेन Z के लोग रूखे या असभ्य क्यों लगते हैं? डॉ. एम. वसी बेग ने बताई वजह

डॉ. एम. वसी बेग

पारिवारिक यात्रा से बढ़ता है आपसी जुड़ाव, बच्चों को मिलते हैं नए अनुभव: डॉ. एम. वसी बेग

Muslim Rashtriya Manch

लखनऊ में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का कार्यकर्ता सम्मेलन, राष्ट्रप्रथम, शिक्षा और सामाजिक सद्भाव का संदेश

Gulshan Public School में Sahaj Yoga Programme, विद्यार्थियों को बताए ध्यान और एकाग्रता के फायदे

Drug De-Addiction Campaign

Agra News: गुलशन पब्लिक स्कूल में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान, विद्यार्थियों ने दिया बड़ा संदेश

बिहार: फर्स्ट एसी कोच में 1.5 लाख की शराब के साथ स्नातक युवती नेहा झा गिरफ्तार

Indresh Kumar,

आगरा से दिया मोहब्बत का पैगाम: इंद्रेश कुमार जी ने कहा- हिंदू-मुस्लिम एक हैं, गंगा-जमुनी तहजीब हमारी पहचान

आगरा में गुरु पूर्णिमा एवं राष्ट्र रक्षा सूत्र कार्यक्रम, इंद्रेश कुमार जी को राखी बांधकर दिया भाईचारे का संदेश

Select Your City

Enable Notifications Allow