आगरा, 15 अगस्त 2026
VandeMataram की 150वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक कल्लू अंसारी के पुत्र अब्दुल हन्नान ने देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर “वंदे मातरम्” का गायन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अब्दुल हन्नान के गायन को सुनकर भावुक हो गए। पूरे माहौल में राष्ट्रप्रेम की गूंज साफ सुनाई दे रही थी। वंदे मातरम् के बोल गूंजते ही श्रोताओं में जोश और गर्व की भावना भर गई।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व
वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सम्मान, प्रेम और समर्पण की भावना का प्रतीक है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह रचना आज भी हर भारतीय के दिल में बसी हुई है।
150 वर्ष पूरे होने पर भी इसकी प्रासंगिकता और महत्व पहले से कहीं अधिक है। अब्दुल हन्नान ने कहा कि वंदे मातरम् हमें याद दिलाता है कि मातृभूमि के प्रति हमारा प्रेम और समर्पण सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने सभी से अपील की कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए हर नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए।
अब्दुल हन्नान का भावुक गायन
अब्दुल हन्नान ने पूरे जोश और समर्पण के साथ वंदे मातरम् का गायन किया। उनके स्वर में राष्ट्रप्रेम की गहराई साफ झलक रही थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर और नारे लगाकर उनका समर्थन किया। कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ गाने का गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति हमारी भावनाओं का जीवंत प्रतीक है। चाहे कोई किसी भी धर्म या समुदाय से हो, मातृभूमि सबकी साझा है और उसके प्रति प्रेम सबका समान होना चाहिए।
राष्ट्रप्रेम और सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि वंदे मातरम् जैसी रचनाएं समाज को जोड़ने और भाईचारे को बढ़ाने का काम करती हैं।
सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच लंबे समय से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इस अवसर पर भी मंच ने राष्ट्रभक्ति का संदेश देने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। कल्लू अंसारी के परिवार द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों का नेतृत्व करना मंच की राष्ट्रवादी सोच को दर्शाता है।
अब्दुल हन्नान ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और समाज में भाईचारे व सद्भाव को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब सभी समुदाय एकजुट होकर आगे बढ़ें।
150वीं वर्षगांठ का महत्व
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पूरे देश में मनाई जा रही है। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों और संस्थानों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।
आयोजकों का कहना है कि नई पीढ़ी को वंदे मातरम् के महत्व और इतिहास से परिचित कराना बहुत जरूरी है। अब्दुल हन्नान जैसे युवाओं द्वारा इसका गायन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
निष्कर्ष

VandeMataram की 150वीं वर्षगांठ पर अब्दुल हन्नान द्वारा गाया गया यह गीत राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करता है। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश दिया गया।
वंदे मातरम् हमारी पहचान है, हमारी भावना है और हमारे राष्ट्रप्रेम का सशक्त प्रतीक है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि मातृभूमि के प्रति हमारा प्रेम कभी कम नहीं होना चाहिए।
वंदे मातरम्!
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