Twisha Sharma Death Case में बड़ा झटका: Bhopal Court ने Second Postmortem की मांग खारिज की

भोपाल, 18 मई 2026Twisha Sharma Death Case में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। भोपाल की अदालत ने मृतका के परिवार द्वारा दायर Second Postmortem की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है और पूरे देश में न्याय की मांग को और तेज कर दिया है।

Twisha Sharma Death Case
Written by: Asiya Shaheen

मात्र 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा, पूर्व Miss Pune और MBA ग्रेजुएट, अपनी शादी के सिर्फ पांच महीने बाद 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फांसी पर लटकी मिली थीं। परिवार का आरोप है कि यह Dowry Harassment और हत्या का मामला है, जबकि पुलिस इसे सुसाइड बता रही है।

दर्दनाक कहानी क्या है?

Twisha Sharma Death Case

ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली एक शिक्षित और महत्वाकांक्षी महिला थीं। दिसंबर 2025 में उनका विवाह भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुआ था। शादी के बाद परिवार का दावा है कि dowry demands, मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक क्रूरता शुरू हो गई।

परिवार ने कहा कि ट्विशा ने मौत से पहले अपने रिश्तेदारों को संदेश भेजे थे, जिनमें “मैं बहुत फंस गई हूं” और “मुझे बचाओ” जैसे शब्द थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एंटीमॉर्टम हैंगिंग बताया गया, लेकिन शरीर पर मिली कुंद चोटें (blunt force injuries) ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

परिवार की भावुक अपील

ट्विशा के माता-पिता और भाई-बहन न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने अदालत से दूसरी पोस्टमॉर्टम की मांग की थी। परिवार का कहना है कि पहली रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है। चोटों की प्रकृति और समय पर स्पष्टता नहीं मिली है।

ट्विशा की मां ने मीडिया से रोते हुए कहा, “मेरी बेटी ने खुद को नहीं मारा। उसे मारा गया है। हमें बस उसका सच चाहिए।”

अदालत का फैसला

भोपाल कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट पर्याप्त हैं। अदालत ने माना कि second postmortem हर मामले में नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस मेडिकल और कानूनी आधार जरूरी होते हैं।

दोनों पक्षों की बात

परिवार का पक्ष: शादी के बाद dowry harassment शुरू हुआ। ट्विशा पर जबरन गर्भपात का दबाव बनाया गया। CCTV, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड्स में सबूत होने का दावा किया जा रहा है।

ससुराल पक्ष का दावा: ट्विशा डिप्रेशन और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थीं और उन्होंने खुद सुसाइड किया।

पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू कर दी है। पति समर्थ सिंह फरार हैं, जबकि सास को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

Second Postmortem का महत्व

Second Postmortem तब मांगा जाता है जब पहली रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठें। फॉरेंसिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करता है, खासकर संदिग्ध मौतों में।

सोशल मीडिया पर उबाल

अदालत के फैसले के बाद #JusticeForTwisha, #TwishaSharmaCase और #DowryDeath जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग खुलकर परिवार के साथ खड़े हो रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।

महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

dowry harassment

यह मामला अब एक व्यक्तिगत घटना नहीं रहा। यह नई दुल्हनों की सुरक्षा, dowry harassment और फॉरेंसिक जांच की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

सोशल एक्टिविस्ट्स मांग कर रहे हैं कि sensitive मामलों में independent forensic review अनिवार्य किया जाए और fast-track courts लगाए जाएं।

आगे क्या हो सकता है?

परिवार अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। पुलिस की SIT जांच जारी है। डिजिटल सबूत, गवाहों की गवाही और नए साक्ष्यों पर सबकी नजर है।

ट्विशा की मौत ने हजारों परिवारों को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग कैंडल मार्च और जस्टिस कैंपेन की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष

Twisha Sharma Death Case अब न्याय, पारदर्शिता और महिला सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। भोपाल कोर्ट के फैसले के बावजूद परिवार की लड़ाई जारी है।

पूरे देश की नजर इस बात पर है कि क्या ट्विशा को आखिरकार न्याय मिल पाता है और जांच पूरी निष्पक्षता से आगे बढ़ती है।

आपकी राय क्या है? क्या sensitive death cases में second postmortem और independent forensic review को अनिवार्य कर देना चाहिए?

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