
Agra (Uttar Pradesh), 26 June 2026: मुहर्रम के पावन अवसर पर आगरा के जीवनी मंडी क्षेत्र से सूफी संत मलंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक कल्लू अंसारी के नेतृत्व में 11 ताजियों का भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न मार्गों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। रास्ते में सनातन समाज के लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए शरबत वितरण कर गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
जुलूस में शामिल लोगों ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए मातम किया और उनके बताए हुए सत्य, न्याय, मानवता और इंसाफ के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे मार्ग में “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ जुलूस में शामिल रहे।
सनातन समाज ने पेश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
इस अवसर पर आगरा की साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर भी देखने को मिली। जुलूस जब विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा तो स्थानीय सनातन समाज के लोगों ने श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।
विशेष रूप से सुरेश गुप्ता एवं जैकी यादव ने अपने सहयोगियों के साथ श्रद्धालुओं के लिए शरबत वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। तेज गर्मी के बीच हजारों लोगों को शीतल शरबत पिलाकर उन्होंने मानव सेवा और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मुहर्रम केवल एक समुदाय का पर्व नहीं बल्कि त्याग, बलिदान और इंसानियत की सीख देने वाला अवसर है। ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होती है।
इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपनाने का संदेश
राष्ट्रीय संयोजक कल्लू अंसारी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का जीवन अन्याय के खिलाफ संघर्ष, सत्य की रक्षा और मानवता की सेवा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज समाज को उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम का संदेश केवल शोक मनाना नहीं बल्कि इंसाफ, भाईचारा, अमन और सामाजिक एकता को मजबूत करना भी है। देश की गंगा-जमुनी तहजीब ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और हमें इसे हमेशा बनाए रखना चाहिए।

शब्बीर अब्बास भी रहे मौजूद
जुलूस में समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास भी अपने सहयोगियों के साथ शामिल हुए। उन्होंने इमाम हुसैन की कुर्बानी को मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी मिसाल बताते हुए कहा कि कर्बला का संदेश हर दौर में प्रासंगिक रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज समाज को नफरत नहीं बल्कि मोहब्बत, भाईचारा और एक-दूसरे के सम्मान की जरूरत है। ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और सभी समुदायों के बीच विश्वास को मजबूत बनाते हैं।
प्रशासन की रही चाक-चौबंद व्यवस्था
जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस अधिकारियों ने पूरे मार्ग पर लगातार निगरानी रखी, जिससे जुलूस बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण वातावरण में अपने निर्धारित मार्ग से होता हुआ कर्बला पहुंचा। प्रशासन की सतर्कता और आम नागरिकों के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश
जुलूस के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं शरबत की व्यवस्था की। लोगों ने एक-दूसरे का अभिवादन कर आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया।
धार्मिक कार्यक्रम में सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने यह साबित किया कि भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता और साझा संस्कृति है। मुहर्रम के इस अवसर पर दिखाई गई भाईचारे की भावना ने समाज के लिए सकारात्मक संदेश दिया।
कर्बला पहुंचकर संपन्न हुई धार्मिक रस्में
निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए सभी 11 ताजिए कर्बला पहुंचे, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम रस्में अदा की गईं। श्रद्धालुओं ने देश में अमन, शांति, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी सामाजिक संगठनों, प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वयंसेवकों तथा विशेष रूप से उन लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने सेवा कार्यों के माध्यम से इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
भाईचारे की मिसाल बना मुहर्रम का जुलूस
पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म चाहे कोई भी हो, मानवता सबसे बड़ा धर्म है। आगरा में निकला यह भव्य ताजिया जुलूस केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक एकता, राष्ट्रीय सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
सुरेश गुप्ता, जैकी यादव द्वारा आयोजित शरबत सेवा तथा विभिन्न समुदायों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि जब समाज मिलकर एक-दूसरे के पर्वों में सहभागी बनता है तो प्रेम, विश्वास और राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक मजबूत होती है। मुहर्रम के इस पावन अवसर पर आगरा ने एक बार फिर देश को भाईचारे, सेवा और इंसानियत का प्रेरणादायक संदेश दिया।
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