Synthetic Milk Racket: Tukaram Mundhe ने बताया कैसे Caustic Soda और Shampoo से बनता है कथित नकली दूध

Synthetic Milk Racket: Tukaram Mundhe ने बताया कैसे Caustic Soda और Shampoo से बनता है नकली दूध

नई दिल्ली: Synthetic Milk Racket को लेकर महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि कुछ गिरोह स्किम्ड मिल्क पाउडर, केमिकल, इमल्सीफायर, कॉस्टिक सोडा (Caustic Soda) और यहां तक कि शैंपू (Shampoo) का इस्तेमाल कर कथित रूप से सिंथेटिक दूध तैयार कर रहे हैं। मुंढे के अनुसार, यह नकली दूध असली दूध जैसा दिखता है, लेकिन इसका उत्पादन बेहद कम लागत में किया जाता है।

Synthetic Milk Racket: कैसे बनता है कथित नकली दूध?

पॉडकास्ट के दौरान तुकाराम मुंढे ने बताया कि जांच के दौरान अधिकारियों को कथित रूप से ऐसे “पैरेलल प्रोडक्शन लाइन” मिले, जहां कम लागत वाली सामग्री से दूध जैसा दिखने वाला तरल पदार्थ तैयार किया जा रहा था।

उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में स्किम्ड मिल्क पाउडर, इमल्सीफायर, रसायन, कॉस्टिक सोडा और शैंपू जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दूध जैसी बनावट और रंग तैयार हो जाता है।

मुंढे ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह गैरकानूनी और बेहद चिंताजनक बताया।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

मुंढे के मुताबिक, कथित सिंथेटिक गाय का दूध तैयार करने की लागत लगभग ₹15 प्रति लीटर आती है, जबकि भैंस के दूध जैसा उत्पाद तैयार करने में करीब ₹30 प्रति लीटर खर्च होता है।

इसके मुकाबले बाजार में असली गाय का दूध लगभग ₹40–₹50 प्रति लीटर बिकता है। ऐसे में सस्ते सिंथेटिक दूध को असली दूध में मिलाकर अधिक मुनाफा कमाने की संभावना रहती है।

FDA की बड़ी कार्रवाई

25 मई को महाराष्ट्र FDA आयुक्त का पद संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने खाद्य मिलावट के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग ने अब तक:

  • 1,131 निरीक्षण (Inspections) किए।
  • लगभग ₹49.57 करोड़ मूल्य के खाद्य उत्पाद जब्त किए।
  • करीब 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध जब्त किया।

मुंढे ने बताया कि विभाग प्रतिदिन 20 से अधिक निरीक्षण कर रहा है।

Milk Adulteration किन-किन स्तरों पर होती है?

मुंढे का दावा है कि कथित मिलावट केवल डेयरी तक सीमित नहीं होती।

जांच के अनुसार, यह कथित रूप से:

  • फार्म स्तर पर,
  • दूध संग्रह केंद्र (Collection Centre),
  • चिलिंग सेंटर,
  • और डेयरी तक पहुंचने से पहले

किसी भी चरण में हो सकती है।

इसी वजह से मिलावट के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

Traceability से मिल सकती है मदद

मुंढे का मानना है कि हर लीटर दूध की Traceability सुनिश्चित करना मिलावट रोकने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

उन्होंने बताया कि दूध संग्रह केंद्रों पर पहले से किसानों, पशुओं और दूध की मात्रा का रिकॉर्ड रखा जाता है। यदि इन रिकॉर्ड को और मजबूत बनाया जाए तो मिलावटी दूध की पहचान आसान हो सकती है।

Technology निभा सकती है बड़ी भूमिका

FDA आयुक्त ने कहा कि आधुनिक तकनीक भी मिलावट रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने National Digital Livestock Mission का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पशुओं की डिजिटल टैगिंग को दूध खरीद के रिकॉर्ड से जोड़ा जाए, तो यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किसी क्षेत्र में वास्तविक उत्पादन कितना होना चाहिए।

अगर रिकॉर्ड में दूध की मात्रा अपेक्षित उत्पादन से अधिक मिलती है, तो यह जांच का आधार बन सकता है।

Consumers Should Stay Alert

विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को केवल विश्वसनीय ब्रांड या प्रमाणित डेयरी से ही दूध खरीदना चाहिए।

यदि दूध के रंग, गंध, स्वाद या बनावट में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी सूचना देनी चाहिए।

Conclusion

Synthetic Milk Racket

Synthetic Milk Racket को लेकर तुकाराम मुंढे के दावों ने एक बार फिर दूध में मिलावट के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उन्होंने जिन तरीकों का उल्लेख किया है, वे जांच के दौरान सामने आए कथित तरीकों पर आधारित हैं। महाराष्ट्र FDA का कहना है कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्यभर में कार्रवाई जारी है और तकनीक आधारित निगरानी से भविष्य में मिलावट पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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