Written by: Asiya Shaheen
दिल्ली में सड़कें 65°C गर्म, मौसम ऐप्स दिखा रहे 42°C — आखिर क्यों है इतना फर्क?
नई दिल्ली, 24 मई 2026 — राजधानी दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। दोपहर के समय कई सड़कों का Surface Temperature 60 से 65 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जबकि Weather Apps और IMD का आधिकारिक तापमान सिर्फ 41-42 डिग्री सेल्सियस दिखा रहा है। इस अंतर को देखकर आम लोगों के मन में भ्रम और सवाल पैदा हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कोई गलती नहीं है। Air Temperature और Surface Temperature दो पूरी तरह अलग चीजें हैं, जिन्हें अलग-अलग तरीके से मापा जाता है।
Air Temperature क्या है?
जब आप किसी Weather App में दिल्ली का तापमान 42°C देखते हैं, तो वह Air Temperature होता है। इसे जमीन से करीब 1.5 से 2 मीटर ऊंचाई पर छायादार और हवादार जगह पर मापा जाता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भी यही तरीका अपनाता है। यानी यह वह तापमान है जो आपकी त्वचा हवा के रूप में महसूस करती है।
Surface Temperature क्यों इतना ज्यादा?

दिल्ली की ज्यादातर सड़कें डामर (Asphalt) और कंक्रीट से बनी हैं। ये सामग्रियां सूर्य की गर्मी को बहुत तेजी से सोख लेती हैं। दोपहर में सीधी धूप पड़ने पर:
- काली सतह ज्यादा गर्मी अवशोषित करती है
- गर्मी लंबे समय तक सतह में बनी रहती है
- परिणामस्वरूप सड़क का तापमान हवा के तापमान से 15-25 डिग्री ज्यादा हो जाता है
यही वजह है कि जब हवा का तापमान 42°C होता है, तो सड़क 60-65°C तक गर्म हो सकती है।
Air Temperature vs Surface Temperature
| पैरामीटर | Air Temperature | Surface Temperature |
|---|---|---|
| माप कैसे होता है | छाया में, 2 मीटर ऊंचाई पर | सीधी धूप में, जमीन/सड़क की सतह पर |
| मापने का तरीका | थर्मामीटर/मौसम स्टेशन | उपग्रह और इंफ्रारेड सेंसर |
| Weather Apps में | यही दिखाया जाता है | नहीं दिखाया जाता |
| अंतर | कम | 15-25°C ज्यादा |
Urban Heat Island Effect ने बढ़ाई समस्या
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में Urban Heat Island Effect गर्मी को और बढ़ा देता है। कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें, वाहनों की गर्मी और AC से निकलने वाली गर्म हवा मिलकर शहर को आसपास के इलाकों से ज्यादा गर्म बना देते हैं।
Climate Change का असर

वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की संख्या, अवधि और तीव्रता बढ़ रही है। दिल्ली में रात का तापमान भी पहले की तुलना में ज्यादा रहने लगा है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाती।
कौन हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो पूरी दिन धूप में काम करते हैं:
- निर्माण मजदूर
- ट्रैफिक पुलिसकर्मी
- डिलीवरी एजेंट
- रिक्शा-ई-रिक्शा चालक
- सड़क किनारे फेरी लगाने वाले
60°C से ज्यादा गर्म सड़क पर खड़े रहना शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
वाहनों और ढांचे पर असर
अत्यधिक गर्मी से सड़कें पिघलने लगती हैं, डामर नरम पड़ जाता है और वाहनों के टायर जल्दी खराब होते हैं। कई शहरों में गर्मी के मौसम में सड़क मरम्मत के खर्चे भी बढ़ जाते हैं।
सबसे अच्छा समाधान: पेड़
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना सबसे प्रभावी उपाय है। पेड़ छाया देते हैं, सतह का तापमान कम करते हैं और हवा को ठंडा रखते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि घने पेड़ों वाले इलाकों में सड़क का तापमान 8-12 डिग्री कम रहता है।
गर्मी से बचाव के उपाय
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में कम निकलें
- खूब पानी पिएं, ORS लें
- हल्के और ढीले कपड़े पहनें
- छाता, टोपी, सनग्लास का इस्तेमाल करें
- बुजुर्गों, बच्चों और पालतू जानवरों का खास ध्यान रखें
- कार में किसी को अकेला न छोड़ें
अंत में
दिल्ली की सड़कों का 65°C तक पहुंचना और ऐप्स पर 42°C दिखना कोई विरोधाभास नहीं है। यह Air Temperature और Surface Temperature के बीच का वैज्ञानिक अंतर है।

बढ़ती गर्मी, Urban Heat Island Effect और Climate Change हमें चेतावनी दे रहे हैं कि शहरी नियोजन में बदलाव की जरूरत है। ज्यादा हरियाली, बेहतर वेंटिलेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
